दोस्ती वाला प्यार
By: Anshu Shandilya
By: Anshu Shandilya
ये फेसबुक की दुनिया भी अजीब होती न, यहाँ कब क्या हो पता ही नही चलता.... ऐसा ही हुआ उस दिन उसके साथ
जानवी को एक लड़के की रिकवेस्ट आयी वैसे तो बहुत सारी रिकवेस्ट आती थी पर ध्यान नही होता था उसका उस लड़के की रिकवेस्ट आते ही जानवी ने तुरंत रेस्पॉन्स किया....
उधर से रिप्लाई 😂😂😂😂ये आया फिर ....
प्रिंस ....hii
जानवी...hello
ऐसे शुरू हुआ उनके मुहब्ब्त का शिलशिला वो दोस्त बने बहुत सी बातें होती रही हँसना बहुत हँसना और खूब सारी
जानवी के ग्रैजुएशन के फाइनल एग्जाम चल रहे थे तो पढ़ती थी वो सारी रात
उधर प्रिंस भी पड़ता था तो दोनों ही ऑनलाइन होते थे बीच बीच मे बाते हो जाया करती थी दोनो की , बातो का सिलसिला ऐसा चला कि दोनों अब एक दूसरेका इंतजार करते पढ़ने के बाद ... बहुत सी बातें होती कभी कॉलेज तो कभी दोस्तो के बारे में तो कभी प्यार के बारे में
जानवी को बहुत अच्छा लगता प्रिंस से बाते करके ,
फिर दोनों के एग्जाम हुए दोनों ही उतीर्ण हुए
प्रिंस m.tach कर रहा था, वो भी अपने कक्षा में अव्वल आया
दोनो का एक दूसरे से बात करना एक आदत सी बन गई थी
धीरे धीरे वक़्त बीतता गया जानवी भी रेलवे में कार्यरत हो गयी
वैसे तो उसकी सफलता का सारा श्रेय प्रिंस को ही जाता था
वो हर पल जानवी को प्रोत्साहित करता रहता था तुम्हे कुछ करना है
जानवी के मन भी आता रहा, वो सक्षम भी हुई
पर वक़्त के साथ प्रिंस के लिए इज्ज़त बढ़ती गयी जानवी के नजरो में
वक़्त का पहिया कब कैसे किस तरफ मुड़े पता नही चलता
जानवी की भाभी जो कि वही से थी जहाँ से प्रिंस था, उनको उनके मायके जाना था
जानवी भी इसी मौके की तलाश में थी, की भाभी के साथ वो भी वहाँ जाए और अपने उस दोस्त से मिले जो अब अपनो के बाद बहुत जरूरी हो गया था,
जानवी भाभी औऱ अपनो के साथ निकल पड़ी शायद अपने उन सपनों को जीने जो बस एक फेसबुक तक था,
जानवी: सुनो आ रही हूं मैं आपसे मिलने
प्रिंस: कब आ रही हो
जानवी: कल
प्रिंस: मिलोगी नही मुझसे
जानवी : तो आप बताओ मैं वहाँ क्यों आउंगी
प्रिंस: मुझे अभी शायद ही छुट्टी मिल पाए
जानवी : वकत निकलिये इतने दुर से हम आ सकते आप वही होकर हमसे नही मिलेंगे
प्रिंस: जानवी तुम्हे लगता है मैं नही मिलूंगा तुमसे तुम आओ मैं कोशिश करता हूं की आ सकूँ
जानवी: 😊
जानवी पहुचती है उनके शहर पर उसका ध्यान बस प्रिंस से मिलने पर ही था, पर कहते हैं न किस्मत वो हर वक़्त आप पर मेहरबान नही होती,
उनको hod से परमिशन नही मिली,
जानवी बहुत मायूस होकर अपने घर आने को रेडी हुई
उसका आना जैसे बेकार हो गया था
वो अपनो के साथ ट्रेन का इंतजार कर रही थी ,
पर अभी अभी आपसे कहा न कि हर वक़्त किस्मत मेहरबान नही रहती ठीक वैसे ही हर वक़्त खराब भी नही रहती
ट्रेन लेट थी 2 घंटे,
प्रिंस आया........
प्रिंस को देखकर जानवी बहुत खुश हुई, वो आया तो था जानवी से मिलने पर बात करते करते सबके दिल मे घर कर गया
भाभी जानवीकी बहुत इम्प्रेस हुई,
वो तो समझ भी चुकी थी कि प्रिन्स जानवी से मिलने आया है,
सबसे बात करने के बाद सबके सामने कैसे बात करता बेचारा प्रिंस जानबी से , जानवी तो बस उसकी बातें और उसको देखे जा रही थी, कितना खुशमिजाज है जैसा सोचा था उससे ज्यादा अच्छा है,
प्रिंस : hai
जानवी : hello
प्रिंस: क्या करते हो आप😂😂
जानवी :😂😂 जॉब with स्टडी😂😂
ऐसी ही बातों के बीच ट्रेन आ गयी जानवी की, जानवी का दिल जोरो से धड़कने लगा
दिल कह रहा था ये वक़्त थम क्यों नही जाता,
सभी ट्रेन की तरफ चलने लगे पीछे से प्रिन्स ने जानवी का हाँथ पकड़ लिया
जानवी का दिल अब औऱ जोरो से धड़कने लगा, जैसे ही एओ पीछे मुड़ी
प्रिंस: जानवी जितनी प्यारी तुम बाते करती थी उससे कही कही ज्यादा प्यारी हो,
जानवी ; आंखों में आंसू लिए प्रिंस बस आपसे मिलने आई थी मैं
प्रिंस : जानता हूँ जानवी
जानवी : हम जा रहे वक़्त हो गया आप अपना ख्याल रखियेगा, आंखों में आंसू लिए वो ट्रेन की तरफ मुड़ जाती है
प्रिन्स :" पीछे से " जानवी मिलने आऊंगा तुमसे मैं बहुत जल्द सारि शिकायते दूर करूँगा वादा है,
जानवी पीछे नही मुड़ना चाहती थी, अगर पीछे मुड़ जाती तो बहुत रोती और भैया और पापा के सामने ये गलत होता
जानवी अपनो को जीने वाली लड़कियों में से थोड़ी खूबसूरत और थोडी नरम मिजाज की थी,
ट्रेन खुली जानवी की नजरें खिड़की से प्रिंस को ढूंढ रही थी, दिल जोरो से धड़क रहा था , प्रिंस जानवी की तरफ ही देख रहा था एक प्यारी सी स्माइल के साथ
पर जानवी आंखों में आंसू को छुपाते हुए एक शिकायत भरी नजरो से देख रही थी,
ट्रेन जैसे जैसे दूर होती गयी वैसे वैसे प्रिंस से जानवी को दूरी का एहसास हो रहा था
जानवी शायद मुहब्बत को महसूस कर रही थी
पर समझ नही आ रहा था,
घर पहुचकर पहला मैसेज प्रिंस को किया जानवी ने, प्रिंस भी मानो उसके मैसेज का ही इंतजार कर रहा हो जैसे
जानवी : hiii
प्रिंस : कैसी जो जानवी
जानवी : ठीक हूँ , आप?
प्रिंस : ठीक हूँ पर....
जानवी : पर??
प्रिंस : तुम्हारी आंखे......
जानवी : ???
प्रिंस : बहुत खूबसूरत है यार ट्रेन को इतनी जल्दी क्या थी
जानवी : आप लेट हुए थे ट्रेन तो पहले ही 2 घटे लेट थी
प्रिंस : अच्छा, तुम ये मानती हो आंखे खूबसूरत है तुम्हारी???
जानवी : नही
प्रिंस : जानवी माफ् कर दो बाबू मैं तुमसे पर्सनली नही मिल पाया पर बाबू आऊंगा मिलने तुमसे
जानवी : कोई बात नही सॉरी नही बोलो आप
आप कुछ वक़्त के लिए आये ये बहुत था मेरे लिए
प्रिंस : इतने प्यारे बचपन से हो कि मेरी संगत में हुए
जानवी : आपके साथ ही
दोनो बहुत जोर से हंसने लगते हैं,
जानवी : मैं सोने जाऊ थक गई हूँ बहुत
प्रिंस : अरे हा तुम जाओ गुड़ नाइट
अब हर रोज की तरह जिंदगी चलने लगी दोनो की,
वही जॉब और पढ़ाई, जानवी की हर रोज की कहानी थी, वो परिवार से कुछ दूर अकेले ही रहती थी, सुबह 9, बजे ऑफिस, शाम 5 बजे वापसी फिर 6 बजे evng क्लास 9 बजे वापसी, थक जाती थी पर इन सब मे वो परिवार और प्रिंस से बात करना नही भूलती थी
प्रिंस भी जानवी के मैसेज का इंतजार करता रहता, शायद दोनो के ही मन मे प्यार के पौधे ने जन्म ले लिया था,
प्रिंस : जानवी
जानवी: हा
प्रिंस : कैसी हो
जानवी : अच्छी हूँ आप कैसे है ?
प्रिंस: ठीक हूँ पर आवाज को तुम्हारी क्या हो गया...?
जानवी : भींग गयी थी ऑफिस से आते वक्त
प्रिंस : पागल हो क्या😠 जरा भी ख्याल नही रखती, बारिश हो रही थी तो कही रुक जाना था
जानवी : पर मुझे भींगना पसंद है आपको मालूम है न
प्रिंस : हा मालूम है अब बीमार हो गईं न😢 माँ को बुला लो घर से
जानवी : इतनी भी बीमार नही हूँ
प्रिंस : मुझे लगता अब मुझे ही वहाँ आकर तुम्हारा ख्याल रखना पड़ेगा
जानवी चुप रहती है प्रिंस डाँटता जाता है जानवी मूक बनकर बस सुनती है और रोने लगती है,
प्रिंस : अच्छा सॉरी , गुस्सा तुम ही दिलाती हो न, ख्याल रखा करो बाबू, मेरा भी यहाँ मन नही लगेगा सोचकर कि तुम बीमार हो ,
अच्छा चलो माफ् करो और प्यारो सी स्माइल करेगा बार्बी डॉल
जानवी : पहले डांटते हैं और फिर हंसने को बोलते हैं
प्रिंस : बाबू ख्याल रखने को बस बोलता हूँ और यो कुछ नही
जानवी : क्यों रखु ख्याल
प्रिंस : मेरे लिए
जानवी : आपके लिए क्यों
प्रिंस : मिलने दो बताऊंगा क्यों,
जानवी: कब मिलोगे
प्रिंस : अगले महीने के 19 को आ रहा हूं🙂
जानवी : खुश होते हुए सच में..
प्रिंस: हा बाबू
जानवी : हम इंतजार करेंगे
प्रिंस : अच्छा सुनो
जानवी : हा
प्रिंस : कुछ खाने को बनाये
जानवी : हा मैगी
प्रिंस : सुधरोगी नही
जानवी : अब तो ऐसी ही हूँ
प्रिंस : इसलिए तो मेरी हो
जानवी : अच्छा
प्रिंस : हा
रात के 2 बज चुके थे,
प्रिंस : सो जाओ जानवी तबीयत भी ठीक नही है,
जानवी : और आप क्या करेंगे
प्रिंस : हम भी सोएंगे
जानवी : शुभरात्रि
प्रिंस: good night
अब तो हर दिन का वही रहता, वक़्त अपनी रफ्तार से बाद रहा था, एक रोज प्रिन्स ने बताया कल दीदी आ रही उनका कल एग्जाम है तो मैं वक़्त जब मिलेगा कॉल करूँगा
जानवी को कभी किसी से शिकायतनही रहती थी उनके अपने जिसमे खुश रहते थे वो भी उसी में अपनी खुशी ढूंढ लेती थी
दूसरे दिन जानवी को तसल्ली थी कि प्रिंस अपनो के साथ है तो खाना पीना वक़्त से किया होगा क्योंकि वो तो लापरवाह था इसलिए इसका ख्याल भी मिलो दूर से जानवी ही रखती थी
सुबह से दोपहर हुई ,दोपहर से शाम , और शाम से रात, फिर रात से सुबह, जानवी परेशान होने लगी , की प्रिंस तो ऐसे कभी नही करता उसे क्या हो गया परसो रात से न कोई मैसेज न कोई कॉल, अब जानवी ने प्रिंस को कॉल करने सुरु किया,
सारा दिन 1 ,1 घण्टे पर करती रही काल रिंग जाती पर कोई रिसीव नही करता
परेसान तो जानवी को होने की आदत थी फिर ये तो बहुत बड़ी बात थी उसके लिए,
2 दिनों तक कोई कॉल मैसेज नही, रात को फोन भी बंद बताने लगा
जानवी को लगा ये प्रिन्स ऐसे नही करेगा
फिर जानवी खुद को मजबूत बनाने का वादा करके सो गई
सुबह 4.30 पे प्रिंस का कॉल आया
प्रिंस: हेलो
जानवी : हेलो
प्रिंस : सॉरी जानवी
जानवी : किस बात के लिए
प्रिन्स : काल या मैसेज कुछ नही किया
जानवी : कोई बात नही
प्रिंस : गुस्सा नही हो न
जानवी : कभी हुई हूँ
प्रिंस : नही, पर हरकतें बुरी है मेरी हुआ करो ताकि सुधार पाउँ
जानवी : आप ठीक हो?
प्रिंस : हा परसो दीदी के एग्जाम के लिए निकले तो फ़ोन घर पे छूट गया था, चार्ज में और एग्जाम के बाद दीदी बुआ जी के यहां जाने को जिद्द की तो ले गया तो कल भी आ नही पाया
जानवी : कोई बात नही
प्रिंस : अच्छा सुनो तुम सो जाओ हम अभी दीदी को ट्रेन चढ़ा के आते
जानवी : ठीक है
प्रिंस और जानवी की बाते दीदी पीछे से सुन रही थी एक आवाज आती कॉल के दौरान ही , भइया किसकी इतनी फिक्र हो रही
जानवी डर के कॉल काट देती है
कुछ देर बाद फिर फोन बजता है
प्रिंस : सुनो
जानवी : हा
प्रिंस : दीदी बात करेंगी
जानवी : यार हम क्या बात करेंगे
प्रिंस ; तुम समझो
दीदी की आवाज आती है
Hello
जानवी : गुड़ मॉर्निंग दिदी
दिदी : कैसे हो बाबू
जानवी : बढ़िया आप कैसी हैं
दिदी : अच्छी हूँ, अच्छा तो तुमने सुधारा है इस नालायक को
जानवी चुप रहती है
दिदी : देखा है मैंने तुम्हें तस्वीरों में बहुत खूबसूरत हो
जानवी : दिदी एग्जाम कैसा रहा आपका
बहुत सी बातें हुईं उस दिन जानवी बहुत खुश हुई, और जानवी से बात करके प्रिंस की दिदी भी,
सबकुछ बहुत अच्छा चल रहा था , जानवी प्रिंस की खूबसूरत प्रेम कहानी बनने जा रही थी
एक दिन अचानक जानवी की बहुत तबियत खराब हुई बहुत ज्यादा ,डॉक्टर को दिखाया तकलीफे बढ़ रही थी एडमिट भी कराया गया
प्रिंस बहुत परेशान हो रहा था, जानवी थोड़ी ठीक होती फोन चाहिए होता उसे
प्रिंस से बात करके वो खुस हो लेती
प्रिंस को भी तसल्ली मिल जाती
NEXT PART COMING SOON...