लापता पानी का मामला
By: Shalini Srinivasan
By: Shalini Srinivasan
रंज के गाँव में जो पानी का तालाब था वो लगभग सूख चुका था। अज्जी बारिश के लिए प्रार्थना करने लगी। अम्मा ने घर में पड़े सभी बर्तन और
बाल्टियों को इकठ्ठा कर उनमें पानी भर दिया।
"हमें ज़्यादा से ज़्यादा पानी इकठ्ठा करके रखना पड़ेगा," उन्होनें कहा।
अप्पा ने थोड़ा गहरा खोदने के लिए औज़ार इकठ्ठा किये। "जब तक बारिश नहीं होती, तब तक गुज़ारे लायक पानी हमें चाहिए होगा," उन्होनें
कहा।
रंज ने अपनी कॉपी और पेंसिल निकाली। फिर अपने दिमाग में पानी के बारे में सोचते हुए चल पड़ी अपने अम्मा-अप्पा के पीछे, पानी के तालाब की ओर। उसने तालाब की निचली सतह की बहुत बारीकी से जांच की।
तालाब का तला सूखा और दरारों से भरा था। रंज सोच में पड़ गयी, "तालाब का सारा पानी कहाँ चला गया? क्या वो भाग गया?
क्या उसे किसी ने चुरा लिया? ये एक बड़ा रहस्य है।"
रंज को रहस्य सुलझाना बेहद पसंद था। जैसे जब अज्जी को अपने पढ़ने वाले चश्मे नहीं मिल रहे थे।
तब रंज ने उनको ढूंढ निकाला था। चश्मे अज्जी की किताब में मिले, उसी पेज पर जो वो पढ़ रही थी।
फिर दूसरी दफा - हाथी भला रागी के खेतों में क्यों आ जाते हैं? तो पता चला कि उनकी जो लंबी - लंबी सूंड़ होती हैं उनसे वो पके हुए अनाज को दूर से ही सूंघ लेते
हैं। और उन्हें खाने आ जाते हैं।
"मैं उस पानी को ढूँढ निकालूंगी," रंज ने बुदबुदाते हुए कहा।
रंज सूखी हुई काई और मरी हुई मछलियों को पार करके तालाब के दूसरी ओर पहुँची।
"क्या आपको पता है कि पानी कहाँ जा सकता है?" उसने एक मछुआरे से पूछा।
"लगता है नीचे की ओर बह गया," मछुआरे ने अंदाजा लगाया।
रंज ने पहाड़ी से नीचे जाती हुई उस सूखी नदी का पीछा किया। जहाँ पर वो नहर ख़त्म हुई वहाँ एक
और तालाब था। वहाँ ढेरों बकरियाँ थीं पर पानी नहीं था।
रंज ने बकरी चराने वाले से पूछा," क्या आप जानते हैं कि पानी कहाँ हो सकता है?"
"शायद, ऊपर!" उस ने कहा।
"मैं तो वहीं से आई हूँ," रंज बोली। "पानी वहाँ नहीं है।"
"तो और ऊपर होगा?" बकरी चराने वाला बोला। "वहीं से तो पानी आता है।"
रंज तालाब तक वापिस चढ़ी। फिर वो पहाड़ी के थोड़ा और ऊपर चढ़ी जहाँ एक और तालाब था। वहाँ न तो पानी था, न पक्षी और ना ही नाव।
केवल एक ही व्यक्ति था वहाँ।
"सपना, मुझे पानी कहीं भी नहीं मिल रहा। क्या तुम्हें अंदाजा है, कि पानी कहाँ चला गया?" रंज ने ज़ोर से आवाज़ लगाई। वो सपना को जानती
थी। वो उसके स्कूल में ही पढ़ती थी।
"नीचे", सपना ने चिल्लाते हुए जवाब दिया।
रंज को एकदम गुस्सा आ गया। उसने अपना पाँव ज़ोर से पटका।
"नहीं!" वो चिल्लाई। "नहीं है। न वो नीचे है और ना ही ऊपर। मैं ढूँढ-ढूँढ के परेशान हो गयी हूँ।
समझ आया?"
"तो क्या, ऊपर, वहाँ?, सपना ने अंदाज़ा लगाया।
रंज और सपना दोनों ने ऊपर आसमान की तरफ देखा। सूरज ने वापस उनकी तरफ घूरा। आसमान
उजला था, गर्मी और धूल से भरा।
"नहीं", दोनों ने हामी में सर हिलाया। वहाँ तो बिलकुल भी नहीं हो सकता।
रंज हताश होकर सपना के संग नाव में जाकर बैठ गयी और कमलककड़ी का एक टुकड़ा चबाने लगी।
वो गर्मी और थकान के मारे बेहाल थी। "मंजू के माता-पिता गाँव छोड़कर चले गए," रंज ने कहा। "वो शहर चले गए जहाँ पर पानी है। शायद हम
सभी को यहाँ से चले जाना चाहिए।"
"तुम जाओ," सपना ने चिढ़ते हुए कहा। "तुम्हें किसी ने नहीं कहा यहाँ रहने के लिए।"
"हाँ! हाँ! ठीक है", रंज ने गुस्से में कहा और पाँव पटकती हुई घर चली गयी।
पर कुछ भी ठीक नहीं था। पानी अभी भी नहीं था। और न ही बारिश।
अगले दिन रंज ने छोटे से गिलास में तालाब के गदले पानी से दाँत मांजे।
"आकथू!" रंज ने थूका।
स्कूल में कक्षा आधी खाली थी। बहुत से परिवार उस इलाके को छोड़ चुके थे।
रंज से अब और बर्दाश्त नहीं हुआ। उसे अपने सभी दोस्तों की याद आ रही थी!
पर्यावरण अध्ययन की क्लास चल रही थी। क्लास के बीच में वो उठी और स्कूल के बाहर भाग गयी।
वो भागती रही, भागती रही, भागती रही। वो बुरी तरह हाँफ रही थी। आखिरकार वो सड़क के किनारे जाकर बैठ गयी।
"मुझे पानी को ढूंढना ही पड़ेगा", वो हाँफते हुए बोली।
"क्या मैं मदद करूँ?", एक आवाज़ आई। वो सपना थी जिसने रंज को स्कूल से भागते हुए देखा था|
रंज का चेहरा चमकने लगा। "हाँ!"
"हमें ये सही प्रकार से करना होगा", सपना ने कहा। "बिलकुल असली सेनेटरी इंजीनियर की तरह।
"किसकी तरह ........? " रंज ने पूछा।
"सेनेटरी इंजीनियर वो होते है जो पानी के पाइप, टंकियाँ और नालियाँ बनाते है। जब मैं बड़ी हो जाऊँगी तो मैं भी एक सेनेटरी इंजीनियर बनूँगी",
सपना ने कहा।
काफ़ी माथा पच्ची के बाद दोनो ने गाँव का नक्शा बनाने की ठानी जिसमें सभी तालाब और नदियाँ हों ताकि उन्हें पता चल पाए कि पानी कहाँ
गया है।
आखिरकार वो दोनों आराम से बैठ गए और अपने ही बनाये हुए नक़्शे को बड़े ही ध्यान से देखने लगे "हमने अभी तक ये तालाब नहीं देखा", रंज ने बहुत सारे तालाबों में से एक की तरफ इशारा किया।
"चलो, चलें," सपना ने हामी भरी। रंज और सपना दोनों पहाड़ी पर चढ़ने लगे। यहाँ की सरिता भी सूखी थी। "शायद हमें स्कूल छोड़कर नहीं आना चाहिए था। ये तालाब भी शायद सूखा ही होगा।", सपना ने उदासी से कहा।
पर जब वो दोनों तालाब के पास पहुँचे, उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ।
तालाब तो पानी से लबालब भरा था!
सपना ने एक छोटे से पंप की तरफ इशारा किया जो तालाब के छोर पर लगा था। मेंड के ठीक नीचे एक टैंकर था, जिसमें सारा पानी जमा हो रहा
था। एक आदमी टैंकर के बगल में खड़ा था और निगरानी कर रहा था।
"रहस्य सुलझ गया", रंज गुस्से में बोली। आमतौर पर रहस्य सुलझाने के बाद जासूसों को ख़ुशी होती है। पर रंज को बेहद गुस्सा आ रहा था।
"तुम हमारा पानी कहाँ ले जा रहे हो?" रंज जानना चाहती थी।
"शहर", आदमी ने कहा। "वहाँ ज़्यादा लोग हैं। इसलिए उनको ज़्यादा पानी की ज़रुरत है।"
"ये बिलकुल सही नहीं है", सपना ने कहा।
आदमी अपना कन्धा उचकाते हुए बोला, "यह तो ऐसा ही है।"
"मेरी दोस्त एक सेनेटरी इंजीनियर है," रंज चिल्लाते हुए बोली। "उसको पता है कि क्या उचित है और क्या नहीं।"
आदमी हँसा, "सेनेटरी इंजीनियर? और तुम? तुम तो अभी बच्चे हो!"
सपना ने धीरे से कहा" हाँ हम बच्चे ज़रूर हैं! पर अच्छी तरह जानते हैं कि तुम हमारा पानी नहीं ले जा सकते।"
"घर जाओ", आदमी बोला। "तुम कुछ बदल नहीं पाओगे।"
"हम तुम्हारा पंप तोड़ देंगे!" रंज चिल्लाई और हाथ में छड़ी लेकर पंप की तरफ दौड़ी।
"ओहो!" आदमी बोला। "पर मुझे तो लगा था की सेनेटरी इंजीनियर पम्प बनाते हैं, तोड़ते नहीं?"
"हाँ ..... नहीं. इस तरह नहीं. ," सपना ने दुखी होते हुए कहा।
पर रंज ने कहा, "मैं एक जासूस हूँ। मैं कुछ भी कर सकती हूँ।"
रंज के पास एक बेहतर योजना थी। वो पंप से जाकर चिपक गई। "अब तुम इसे नहीं चला सकते।"
सपना भी भागकर गयी और पंप को जकड़ लिया।
"ऐ!", आदमी चिल्लाया। अब वो बहुत गुस्से में था। "घर जाओ अपने" उसने कहा।
उसी समय घनघोर घटा छा गयी। आकाश में ज़ोर से गड़गड़ाहट हुई, बादल गरजने लगे, बिजली
चमकने लगी और ज़ोरों से बारिश होने लगी। सपना खिलखिलाकर हँसने लगी।
मानसून आ गया!"
"मैं तो घर जा रहा हूँ, तुम जाओ न जाओ," टैंकर वाले आदमी ने कहा।
बारिश होती रही, होती रही, होती रही।
व्हूश, तालाब के बंध के ऊपर से पानी बह निकला और नदी में बहने लगा। पानी ने उन्हें भिगो दिया।
"पानी मिल गया! रहस्य सुलझ गया!" रंज बोली।
"याहू!" दोनों ख़ुशी से चिल्लाने लगे।अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो, तो इसे अपने समुदाय में साझा करें। और ऐसी ही ढेरों रोचक कहानियाँ पढ़ने के लिए LeafyReads पर ज़रूर आएँ।