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1. विश्व हिन्दी सम्मेलन

पोर्ट लुई के घाट पर,नवपंडों की भीर;
रोली, अक्षत, नारियल,सुरसरिता का नीर;
सुरसरिता का नीर,लगा चन्दन का घिस्सा;
भैया जी ने औरोंका भी हड़पा, हिस्सा;
कह कैदी कविराय,जयतु जय शिवसागर जी;
जय भगवती जागरण,निरावरण जय नागर जी ।

2. अस्पताल की याद रहेगी

योग, प्रयोग, नियोगकी चर्चा सुनी अपार;
रोग सदा पल्ले पड़ा,खुला जेल का द्वार;
खुला जेल का द्वार,किया ऐसा शीर्षासन;
दुनिया उलटी हुई,डोल उट्ठा सिंहासन;
कह कैदी कविराय,मुफ्त की मालिश महंगी;
बंगलौर के अस्पताल की याद रहेगी। 

3. धरे गए बंगलौर में

धरे गए बंगलौर में, अडवानी के संग;
दिन-भर थाने में रहे, हो गई हुलिया तंग;
हो गई हुलिया तंग, श्याम बाबू भन्नाए;
'प्रात: पकड़े गए, न अब तक जेल पठाए ?'
कह कैदी कविराय, पुराने मंत्री ठहरे;
हम तट पर ही रहे, मिश्र जी उतरे गहरे। 

4. पाप का घड़ा भरा है

जन्म जहाँ श्रीकृष्ण का, वहां मिला है ठौर;
पहरा आठों याम का, जुल्म-सितम का दौर;
जुल्म-सितम का दौर; पाप का घड़ा भरा है;
अत्याचारी यहां कंस की मौत मरा है;
कह कैदी कविराय, धर्म ग़ारत होता है;
भारत में तब सदा, महाभारत होता है। 

5. बजेगी रण की भेरी

दिल्ली के दरबार में, कौरव का है ज़ोर;
लोक्तंत्र की द्रौपदी, रोती नयन निचोर;
रोती नयन निचोर नहीं कोई रखवाला;
नए भीष्म, द्रोणों ने मुख पर ताला डाला;
कह कैदी कविराय, बजेगी रण की भेरी;
कोटि-कोटि जनता न रहेगी बनकर चेरी। 

6. अनुशासन पर्व

अनुशासन का पर्व है, बाबा का उपदेश;
हवालात की हवा भी देती यह सन्देश:
देती यह सन्देश, राज डण्डे से चलता;
जब हज करने जाएँ, रोज़, कानून बदलता;
कह कैदी कविराय, शोर है अनुशासन का;
लेकिन ज़ोर दिखाई देता दु:शासन का। 

7. जेल की सुविधाएँ

डाक्टरान दे रहे दवाई, पुलिस दे रही पहरा;
बिना ब्लेड के हुआ खुरदरा, चिकना-चुपड़ा चेहरा;
चिकना-चुपड़ा चेहरा, साबुन, तेल नदारत;
मिले नहीं अखबार, पढ़ेंगे नई इबारत;
कह कैदी कविराय, कहां से लाएँ कपड़े;
अस्पताल की चादर, छुपा रही सब लफड़े। 

8. अंधेरा कब जाएगा

दर्द कमर का तेज, रात भर लगीं न पलकें,
सहलाते रहे बस, एमरजैंसी की अलकें,
नर्स नींद में चूर, ऊंघते रहे सभी सिपाही,
कंठ सूखता, पर उठने की सख़्त मनाही,
कह कैदी कविराय, सवेरा कब आएगा,
दम घुटने लग गया, अंधेरा कब जाएगा। 

9. नहीं पुलिस का पीछा छूटा

घर पहुंचे हम बाद में, पहले पुलिस तैयार;
रोम-रोम गद्गद हुआ, लखि सवागत-सत्कार;

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