Notifications

No new updates

Welcome to LeafyReads! 🌿 Discover new books...

ago

Create Your Account

Already have an account? Sign in
Funny loading GIF Google icon Continue with Google

Support LeafyReads

Your contributions help us keep the library free and support rising authors.

By clicking "signup" you agree to our Terms of Service & Privacy Policy.
Loading...

Unfolding stories, please wait...

Start Reading Now

"मुझे बहुत ड़र लग रहा है विनय, पता नही इस तरह घर से भाग कर हम सही कर रहे है या नही। अबतक तो पापा को भी पता चल गया होगा की मैं घर में नही हूँ।"
भागते भागते ही माहिरा ने विनय से कहा।


"अंकल को ख़बर होने से पहले हमें यहाँ से निकलना होगा। मगर तुम घबराओ मत। क्यों ड़र रही हो? देखो, जबतक मैं तुम्हारे साथ हूँ, तुम्हें कोई कुछ नहीं कर सकता। भरोसा रखो, मैं तुम्हें कुछ नही होने दूँगा।"
माहिरा को हिम्मत देते हुए विनय उससे कहने लगा।


विनय की बातें सुनकर माहिरा के घबराएं हुए चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट आ गयी। तभी विनय की नज़र सामने खड़े एक आदमी पर गई। वह अचानक रुक गया और उसने माहिरा का हाथ पकड़कर उसे रास्ते में खड़ी एक गाड़ी के पीछे खींच लिया।


अचानक ऐसा क्या हुआ, माहिरा को कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह विनय से इस बारे में पूँछने ही वाली थी की विनय ने उसके होठों पर अपना हाथ रख कर उसे चुप रहने का इशारा किया। मौका मिलते ही विनय बड़ी ही सावधानी से माहिरा को वहाँ से दूसरी जगह पर लेकर गया।


"मुझे लगता है अंकल को तुम्हारे घर में ना होने की ख़बर लग गई है।"
विनयने हाँफते हुए माहिरा से कहा।


"तुम इतने कॉन्फिडेंस से कैसे कह सकते हो?"
माहिरा ने विनय से पूछा।


"क्योंकि जब मैंने तुम्हें उस गाड़ी के पीछे की तरफ खींचा था तब सामने जो आदमी था उसे मैंने कई बार अंकल के साथ देखा था। हो न हो, अंकल ने जरूर उस आदमी को तुम्हे ढूंढने के लिए भेजा होगा। हमें बहुत सावधानी से कदम उठाना पड़ेगा।"
माहिरा की बात का जवाब देते हुए विनय ने कहा।


"मुझे लगता है कि हमें रात होने तक कही छिप जाना चाहिए। जैसे से रात हो जाएगी, हम अँधेरे का फायदा उठाते हुए मुंबई की तरफ़ निकल जाएंगे।"
माहिरा का यह सुझाव विनय को भी पसंद आया।


"मगर हम जाएंगे कहाँ? बस यही समझ नही आ रहा।" माहिरा ने दूसरे ही क्षण में अपने मन की आशंका को विनय के सामने रख दिया।


"मैं जानता हूँ एक जगह, जहाँ हमे कोई नही ढूंढ सकता।"
थोड़ी देर सोचने के बाद विनय ने एक रहस्यमयी मुस्कान के साथ माहिरा से कहा और उसे लेकर विनय उस जगह पर पहुँच गया।


वहां जाने पर माहिरा बड़े ही आश्चर्य से कभी विनय की तरफ और कभी उस जगह को देखने लगी।
"क्या हुआ माहिरा? तुम ऐसे क्यों देख रही हो?"
माहिरा को अपनी तरफ देखता हुआ पा कर विनय ने उससे पूछा।


"राजभवन... तुम... तुम जानते भी इस जगह के बारे में?"
ऐसा कहते वक़्त माहिरा के चेहरे पर घबराहट भरे भाव साफ़ दिखाई दे रहे थे।


"देखो, इस वक़्त इस जगह से बढ़कर इस शहर में कोई और जगह नहीं है जहाँ हम बेफिक्र होकर छिप सकेंगे।"
विनय ने माहिरा की तरफ़ देखते हुए कहा।


"हम... यहाँ... कैसे... कैसे रुक सकते है? मुझे लगता है... मुझे लगता है कि हमे कही और... किसी और जगह जाना चाहिए। विनय... विनय... मैंने एक बार अख़बार में पढ़ा था कि यह जगह बड़ी ही डरावनी है। साथ ही साथ ये भी पढ़ा था कि... की यहाँ जानेवाला कोई भी इंसान... फिर लौटकर नहीं आया है। हमे यहाँ नही रुकना चाहिए विनय।"
माहिरा ने ड़रते हुए उस जगह पर रुकने से लगभग इंकार कर दिया।


"मुझे सब पता है, मैंने भी अख़बार में इस जगह के बारे में पढ़ा हुआ है। और इसलिए मैंने इस जगह का चुनाव किया है। हमें कुछ देर इसी जगह रुकना चाहिए।"
माहिरा को समझाते हुए विनय बोला।


"मगर क्यों विनय? इस जगह के बारे में सब पता होकर भी तुम यहाँ क्यों रुकना चाहते हो?"
माहिरा ने एक और सवाल विनय के सामने रख दिया।


"अरे बाबा... जिस तरह तुम इस जगह से ड़र रही हो वैसे और भी कई लोग ड़रते है। कोई सोच भी नही सकता कि हम यहाँ छुपे होंगे। हम आराम से यहां रुक सकेंगे।"

विनय अपनी बात माहिरा से कहने लगा।


"मगर और लोगों की तरह हम भी फिर वापस नहीं आ पाएं तो?? कही हमें कुछ हो गया तो??"

Page 1 of 3